Wednesday, September 27, 2017

स्त्रियां कितनी तरह से बोलती हैं


सामने की सीट पर
खिड़की से सटे बैठी वो
बाहर तेजी के साथ भागते दृश्य को
निरेखती, कभी मुस्कुराती कभी शांत और
उद्धिग्न हो उठती...
बालों की उड़ती लटें,माथे की बिंदी का उजास
कानों के मचलते कुण्डल
इधर-उधर हिलते हाथों से
चूड़ियों की झनकार
भौहों ,होठों का बारिक विष्रेप...

स्त्रियां कितनी तरह से बोलती