Saturday, January 2, 2016

तुम्हारी याद

कोलाव तट की 
सोने की रेत बीनती 
सपनो के पंख फड़फड़ाती 
पहाडी सांझ सी उतर मेरे आँचल में 
सितारे टाँकती 
.....तुम्हारी याद ..!
सिहरन भरी हवा सी
आकाश के सूनेपन में बजती
अनुभूति की तरह नदी को
छूती सहलाती बहती चली आती...
तुम्हारी याद है कि सखी मेरी .. ...!!