Saturday, October 19, 2013

धमनी में

शिरा में
रक्त के हर कण में
हड्डियों के जाल में

दिन-रात जो करता है विचरण
वह प्रेम है...

कटुता को मधुर बनाता
असत्य को,सत्य की ओर ले जाता
पापी को पुण्यवान बनाता
अन्धकार में प्रकाश दिखाता
वह प्रेम है...

है जीवन का सार
आकाश के सामान सर्वनिष्ठ
   जो करे  सौन्दर्य में वृद्धि
जो ईश्वरोन्मक्त हो जाता है

वह प्रेम है...वह प्रेम है...!!