Wednesday, September 27, 2017

स्त्रियां कितनी तरह से बोलती हैं


सामने की सीट पर
खिड़की से सटे बैठी वो
बाहर तेजी के साथ भागते दृश्य को
निरेखती, कभी मुस्कुराती कभी शांत और
उद्धिग्न हो उठती...
बालों की उड़ती लटें,माथे की बिंदी का उजास
कानों के मचलते कुण्डल
इधर-उधर हिलते हाथों से
चूड़ियों की झनकार
भौहों ,होठों का बारिक विष्रेप...

स्त्रियां कितनी तरह से बोलती 

Friday, July 14, 2017

औरतें प्रेम में तैरने से प्यार करती हैं




ऐसा नही था कि
वह रोमांटिक नही थी..
पर दमन भी तो था उतना ही

तुम्हे देख
बह निकली थी अदम्य वेग से
समन्दर को लपकती है जैसे नदी

अब जब विचारणा
मस्तिक से गायब है
कुड़कुड़ाहत बेचैनी शांत है
तुम्हे रख लिया है उसने सम्भालकर
हथेली के छाले की तरह

पता है उसे
प्रेम उसका अर्पित है
सदा-सदा के लिए
अंकुरा गई है फिर भी
उसकी आशाएं,आकांक्षाएं फिर से

बादलों की फुईयों से
गुंजायमान हो उठी हो घाटी जैसे
तुम्हे प्यार करते
वह घाटी के विस्तार को
पार कर चुकी है
गहराई में डूब गई है
दोहराते हुवे प्रेम
उसके पोर-पोर से
किरणों के सदृश्य फूटता है प्रेम

तुम्हे प्यार करते हुवे
पहली बार जाना उसने
औरतें प्रेम में तैरने से प्यार करती हैं
औरतें प्रेम के लिए जीती हैं
औरतें प्रेम के लिए मरती हैं...!

       वसुन्धरा पांडेय

Sunday, May 1, 2016

प्रेम में

खुद को विसर्जित कर देना
किसी के लिए
किसी को
आसान नही होता
आसान तब होता है प्रेम में
हम जब विसर्जित होते हैं
सौंपते हैं पहाड़ों भरा आकाश
लहलहाते अरण्य वन
कोमल पत्तियों सी
ह्रदय का यह पट
हाँ....सौंपते हैं
अपनी बूँद-बूँद लहू
रातों की नींदें
विसर्जित करते हैं अपने अहम्
क्यूँकी..तब होते हैं हम प्रेम में ..!!

Monday, January 4, 2016

स्पर्श: कवयित्री वसुंधरा पाण्डेय की 8 कवितायेँ

स्पर्श: कवयित्री वसुंधरा पाण्डेय की 8 कवितायेँ: ’ मेरे लिए कविता लिखना सांस लेने जैसा है – मुझमें जीवन ऊर्जा का संचार करती हैं कवितायेँ /और मेरा मानना है कि कविता में प्राण तत्वों की...

Saturday, January 2, 2016

तुम्हारी याद

कोलाव तट की 
सोने की रेत बीनती 
सपनो के पंख फड़फड़ाती 
पहाडी सांझ सी उतर मेरे आँचल में 
सितारे टाँकती 
.....तुम्हारी याद ..!
सिहरन भरी हवा सी
आकाश के सूनेपन में बजती
अनुभूति की तरह नदी को
छूती सहलाती बहती चली आती...
तुम्हारी याद है कि सखी मेरी .. ...!!