Saturday, May 9, 2015

माँ


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माँ के भीतर तो खड़ा होकर हम
दुनिया को अंगूठा दिखाये थे
माँ की आँखों के ताल में
डुबकी लगाएं ,तैरना सीख जाये
घर ही नही ,माँ तो पूरा गाँव ठहरी
ढोलक की थाप थिरकेँ,मंगल गीत गायें
गाँव ही नही माँ तो पूरा देश ठहरी
इत-उत् जायें
गोद में लेट जायें ,रोधना पसारे
देश ही नही माँ ब्रम्हांड ठहरी... !