Monday, May 13, 2013

तितली सा मन तो उड़ेगा ही.

सूरज घुटे तो घुटे
चाँद छिजे तो छिजे
अपना तो
तितली सा मन
उड़ेगा ही
प्रीत का वरदान है...

गुलाल की दीवार है
इंगुर की छ्त है
कमल का पलंग है
फूलों की सेज है...

खुशियों का झूला तो
झूलेगा ही...

तितली सा मन तो
उड़ेगा ही...!