Friday, July 26, 2013

दो छोटी कवितायेँ

एक
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पलकें निश्चल
पुतलियों में हलचल
स्वप्न क्यूँ देखूं तेरा ही
बार-बार, हर बार...!!

दो
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बोझिल,बेनूर शाम
मटीआला आसमान
समय दिन कोई हो
'नदी'
बहती बिलकुल मुझसी हो... !!