Sunday, July 14, 2013

गीली-गीली धूप में

तेरी आवाज
दूर से
खिल-खिलाता सा कोई बादल
गीली-गीली धूप में
तर-ब-तर लिपटा जैसे प्यार

चुपके से उतर कर
धरती के अन्तस् को
भिगोने लगा है

पत्ता-पत्ता हरा होने लगा है...!!