Friday, September 9, 2011

अपना मिलना


अपना मिलना
इत्तेफाक न समझो...

सदियाँ गुजर जाती है
लम्हों को सजाने में,और 
एक क्षण लगता है
उसे बिखर जाने में...

जितना समेट सकते
समेट लो.....
बीते हुए पल
वापस नहीं आयेंगे...
आने वाला पल
यूँ न गवाएंगे... !!

7 comments:

  1. सुन्दर प्रस्तुति.
    आपके भाव समंदर से मिलन के
    अहसास अच्छे लगे.
    आपका दूसरा फालोअर बनने का सुअवसर
    मैंने नहीं गंवाया है.

    मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है.

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  2. सादर आभार है आपका...और अपार ख़ुशी हुयी आपको देख कर ....आपके ब्लॉग कोfollow करना मै नहीं भूली ..

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  3. बहुत बहुत धन्यवाद, वसुंधरा जी.
    आप मेरे ब्लॉग की फालोअर बनी बहुत खुशी मिली.
    आपके सुवचनों का टिपण्णी दान भी मिलता
    तो आपका मुझ पर विशेष अनुग्रह होता.
    आभार.

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  4. अपना मिलना
    इत्तेफाक न समझो...
    सदियाँ गुजर जाती है....बहुत ..सुंदर.

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  5. सुंदर रचना के लिए आपको बधाई

    संजय कुमार
    आदत….मुस्कुराने की
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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